एक बार एक लोमड़ी जंगल में भटक रही थी। वह थक गई थी और वहां थक कर वह सो गई। जब वह उठी तो उसने देखा कि एक बिल्ली उसके पास है और वह उसे देखती ही थी। लोमड़ी बिल्ली से दूर नहीं भाग सकती थी और वह उसकी जान ले गी।
लोमड़ी ने अपने आप को संभाला और फिर बिल्ली के पास गई और बोली, "बिल्ली जी, आप क्यों मुझे खा नहीं लेती हैं?" बिल्ली बेहोश हो गई।
लोमड़ी ने बिल्ली को जगाया और फिर कहा, "आप मुझे खा सकती हो, लेकिन फिर भी मैं आपका दोस्त हूँ। मुझे अच्छा लगता है कि मैं जीवित रहूँ और आपके साथ दोस्ती करूँ।"
बिल्ली ने लोमड़ी के बारे में सोचा और फिर उसके साथ दोस्ती की। वे दोनों अब एक साथ खेलते हैं और खाते हैं।
इस कहानी से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपनी हिम्मत खोने की जगह जीत की तलाश करनी चाहिए। यदि हम अपनी हिम्मत खो देते हैं, तो हम हमेशा हार जाते हैं।